प्यार नही करना है तो फिर जताती क्यों हो

दर्पण के टुकड़े प्यार नही करना है तो फिर प्यार जताती क्यों होदूर दूर रहना है तो फिर पास में आती क्यों होदिल से दिल ही नही मिले तो जिस्म मिलेगे कैसेनही मिलाना दिल से दिल तो हाथ मिलाती क्यों होप्यास बुझाने की तुझ में ना चाहत है ना हिम्मत प्यास बुझा सकती ही नही तो प्यास... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[21 Jan 2010 04:53 AM]

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