हिमालय में हैंड ग्लाइडिंग, नहीं पहाड़ में हिचकोले खाती जिंदगानी हरदम
यह छः कविताओं की श्रृंखला है. मनाली से केलंग जाने के रास्ते में रोहतांग दर्रे से शुरु होकर धर्मशाला तक पहुंचाती हुई एक जमीनी उड़ान. बारी बारी से छहों कविताओं को पढ़ने का लुत्फ उठाइए. इस बार पहली कविता - 1 ओ मेरे रोहतांग! ओ मेर राल्हा! चलते चले आए नदी...
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anup
कविता
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[21 Jan 2010 04:44 AM]



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