मदन गोपाल लढ़ा की राजस्थानी कविताएं [हिन्दी अनुवाद]

साहित्य शिल्पी भाषाखेत के रास्तेमैंने सुनींग्वाले के बांसुरीबांसुरी से याद आईकान्हा की बांसुरीबांसुरी की भाषा कोमान्यता की नहीं जरूरतराग-रंग, हर्ष और दुख कीहोती सदैव एक ही भाषा.***** बच्चे भगवान होते हैं!बच्चा अनजान होता हैरीत-कायदाकब जाने!बच्चा नासमझ होता... [पूरी पोस्ट]
writer साहित्य-शिल्पी

कविता

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[21 Jan 2010 02:30 AM]

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