ठिठुरन और मैं

वृद्धग्राम जब मैं घर लौटा तो रात के आठ बजे थे। मैं ठिठुरता हुआ पहुंचा था। मोहित प्रोजेक्ट तैयार कर रहा था। उसी सिलसिले में उसे मेरी मदद की जरुरत थी। ये आजकल के बच्चे भी न, मेहनत उतनी करना चाहते नहीं, बातें बड़ी-बड़ी करते हैं। कुछ फोटो मैंने उसे सीडी में करवाये ताकि... [पूरी पोस्ट]
writer harminder singh

cold

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[21 Jan 2010 01:54 AM]

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