मैं पाकिस्तान से प्रेम करता हूँ, तुम भी करो
मैं अमितजी से आँखे चुराता हूँ, जी चाहता है मुम्बई पहुँच जाऊँ और कसाब को कस कर गले लगा लूँ. मुझे माफ करना भाई तुम्हारे प्रेम को समझ न सका....
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संजय बेंगाणी
लोकाचारराष्ट्ररंग
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[21 Jan 2010 01:55 AM]



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