९१ कोजी होम
पीछे मुड के देखने की आदत नहीं है ,गुलज़ार साहब की । आज तक ,हजारो लोग मिले उनसे ,बहुत करीब से दोस्त भी हुए ....फिर किसी मोड़ पे ,छोड़ के चले गये .....जो उनके साथ चले ,वह बहुत कम लोग हैं ।उनके दोस्तों में ,एक राही साहब थे ,गुज़र गये कुछ साल पहले । शाम होते...
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भंगार
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[21 Jan 2010 01:14 AM]



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