चक्र सुदर्शन डोल रहा...करता नए प्रयोग...
जब कवियों का गान हो, सुधी श्रोताओं का मान हो और अपने गणतंत्र का गान हो तो माहौल देखते ही बनता है। रातों को सूनी हो जाने वाली लाल किले की दीवारें तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठती हैं। रात का सन्नाटा हंसी की फुहारों से गुलज़ार हो जाता है। लाल किले में...
[पूरी पोस्ट]
vikas vashisth
14
2
0
2
0
[21 Jan 2010 01:08 AM]



Shuffle








