कब तक युवा रहेगा बसंत?
सुरसा मुख सीबढती मंहगाईकोल्हु के बैल कंधों परगृहस्थी का जुड़ा डालेप्राण वायु मे घुलता जहररसायन से मौत उगलते खेतबोझ से झुकी कमरदीमक लगी उमरजो नित चाट रहीजीवन रेखाघुटने साथ नही देतेलेकिनवो कहते हैंबसंत बुढा नही होताकोई उनसे पूछेमोतियाबिंद सेअंधी हुई आंखे...
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ललित शर्मा
कविता
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[20 Jan 2010 21:41 PM]



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