माँ शारदा के चरणों में सादर नमन
श्वेत पत्रों से पंकज के फिसली हुई ओस की बूँद ढल स्याहियों में गई बीन के तार के कम्पनों से छिटक एक सरगम आ सहसा कलम बन गई फिर वरद हस्त आशीष बन उठ गया बारिशें अक्षरों की निरंतर हुईं शब्द की छंद की माल पिरती हुई आप ही आप आ गीत तब बन गई.माँ शारदा के...
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राकेश खंडेलवाल
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[20 Jan 2010 20:40 PM]



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