प्रकाश की तरंगें छोड़तीं पदचिह्न
''प्रकाश की तरंगेंछोड़तीं पदचिह्नसमय के खेत तकपहुँचा सकते हैं वे हमेंलेकिनचलना तो हमें ही होगाकिसान की तरहसधे कदमों सेअपने खेत की मिट्टी कीपुकार सुनते हीक्या तैयार हैं हम ?''...
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कविता
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[14 Jan 2010 13:24 PM]



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