ज्योति बसु के लिए - २
ज्योति बसु के लिए - २ एक पेड़ का बयानफूल से होते हुए फल के पेट में पहुंचापकता रहा वहीँमुद्दत तकएक दो- पहरपेड़ का बयानटपक करधूल में जा गिराआँखों में एक समझदार चमक लिएबड़ी - बड़ी सफ़ेद और पीली कीलों की नोकों...
[पूरी पोस्ट]
....
कविता
19
0
0
0
1
[18 Jan 2010 15:22 PM]



Shuffle








