मुक्तक
मुक्तक जितनी सर्द हवाएं होंगी उतनी आग जलेगी मन के हर कोने कोई चिंगारी सुलगेगी यदि शांत हो जाएगी यह आग लगी जो दिल में फिर तो सर्द हवाएं दिल को अपना सा कर देंगी सर्द हवाओं को भी मैंने मन से कब कोसा है यही समय तो मन -अलाव को सुलगना होता है यदि यह सुलगेगा न...
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vedvyathit
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[20 Jan 2010 09:01 AM]



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