लन्दन में लड़की
एक अकेली एक शहर में आशियाना ढूंढती है, आबूदाना ढूंढती है!!उसे भी बच्चों की किलकारी और कोयल की कूक भली लगती है.उसके पास ठाठे मारता अल्हड बांकपन है! आम इंसान का दिल है. भले ग़म का हुजूम हो लेकिन खुशियों की लज्ज़तें उसे भी चाहिए, आखिर क्यों नहीं!...
[पूरी पोस्ट]
शहरोज़
महिला : सर्वे
21
2
0
2
16
[20 Jan 2010 10:47 AM]



Shuffle








