मीठी यादें गावं की (Ek baar aur)

Arshad ke man se........ शहरी रंग बेरंग से धूसर मिटटी गावं की धुप शहर की शूल सरीखी इच्छा आम के छाव कीहाय-हेलो की चकाचौंध में स्पर्श बड़ों के पावँ कीअंग्रेजी के कावं-कावं में मीठी बोली गावं कीशाम की बर्गर,रात की पिज्जा पानी पूरी कोको कोला दाल-भात में चोखा-चटनी खाना मेरे गावं की... [पूरी पोस्ट]
writer Arshad Ali
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[20 Jan 2010 10:32 AM]

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