एक मगही गीत
गीतकार -पंडित युदनंदन शर्मासब कोई गंगा नेहा के निकल गेल,आ तू बइठल के बइठले ह।ढिबरी भी सितारा हो गेल,आ ढोलकी भी नगाड़ा हो गेल,आ तू फुटल चमरढोल के ढोले ह।झोपड़ी भी अटारी हो गेल,कसैली भी सुपारी हो गेल।कुर्ता भी सफारी हो गेल,छूरी भी कटारी हो गेल,आ तू ढकलोल...
[पूरी पोस्ट]
Alok Nandan
17
1
0
1
4
[20 Jan 2010 09:37 AM]



Shuffle








