वसंतागम और 'सब्जी है उपहार प्रकृति का'

कर्मनाशा शिशिर का हुआ नहीं अन्तकह रही है तिथि कि आ गया वसन्त !अभी कुछ देर पहले एक कार्यक्रम से लौटा हूँ। सरस्वती पूजा , वसन्त पंचमी और निराला जयन्ती को लेकर कस्बे में एक आयोजन था जिसमें बहुत कुछ सुनने को मिला। आज सुबह का अख़बार भी ' सखि वसन्त आया' की पंक्ति लेकर... [पूरी पोस्ट]
writer sidheshwer

कविता

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[20 Jan 2010 09:02 AM]

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