वसंत आया

कर्मवीर शीत विदा कर धरती झूमी लो वसंत आयानव श्रृंगार रूप का प्रकृति सुंदरी ने करवायाउतार फेंकी धुंधली चादर भोर ने कोहरे कीओढ़ लिए सुनहले पर सूरज के किरणों कीउमंग लिए धरती की दुल्हन ने ली अंगड़ाईप्रेम गीत से भ्रमरों ने नव कलियाँ चटकाईदृग भरे बलखाती आमों की बौराई... [पूरी पोस्ट]
writer अर्चना तिवारी
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[20 Jan 2010 08:54 AM]

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