माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ...
माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ... नेत्र तुम्हारे मोती जैसे वर्ण तुम्हारा जैसे कंचन मेरी जिह्वा तू विराजे चेतना दे जीवन तार दे माँ शारदे, माँ शारदे, माँ शारदे ...तेरे सुयश को गा सकूँहर जन्म तुझको पा सकूंपद कमल को नहला सकूँ...
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चेतना के स्वर
बसंत पंचमी
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[20 Jan 2010 07:40 AM]



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