ये ही क्या वसंत है?...........घुघूती बासूती
प्रकृति से रिक्तरंगों से अछूतीधूल के गुबार हैं।न कोई आम्रमंजरीन कोई मंजरी महकडीजली,पैट्रौली बास है।कोयल नहीं कूकती चिड़िया नहीं चहकतीवाहनों की बस गूँज है।सरसों नहीं फूलतीन गेहूँ की बालियाँबोनसाई बरगद ही वृक्ष है।ठंड तो पड़ी नहींअंगीठी सेकी नहींए सी ने...
[पूरी पोस्ट]
Mired Mirage
कविता
66
6
0
6
24
[20 Jan 2010 07:18 AM]



Shuffle








