कुछ और दिल की बातें
देखिये ना इन मदभरी निगाहों से हमें,ना जाने क्या खता हो जाए ।हम दिवाने होकर भटकते फिरे ,और आप किसी ग़ैर की हो जाए ॥---------------------------------देखा है हमने भी ज़न्नत को ख्वा़बो मे अकसर ।फिर भी हमें उनका मुस्कुराना बेहतर लगा...
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dipayan
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[20 Jan 2010 06:03 AM]



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