वो यादें...

Awaz Do Hum Ko एक लम्बे वक्त से सुबह उठ कर देखता हूं, दो कबूतरों का जोड़ा मेरे कमरे के बाहर लगे पेड़ पर आ कर बैठता है, उस पर लटकी गागर से प्यास बुझाता है, दो चार बूंदें एक दूसरे के परों पर डालते हैं और फिर उड़ जाते हैं...ये रोज़ का खेल है, जैसे उनकी आदत सी हो गई... [पूरी पोस्ट]
writer Razi Shahab
views
18
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
7
[20 Jan 2010 04:14 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix