आधुनिक कॉरपोरेट मैनेजमेंट और श्रीमाद्भाग्वाद गीता

जिन्दगी की पाठशाला महाभारत की पृष्टभूमि में महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमदभगवद गीता को केवल एक धर्म ग्रन्थ कहना सूरज को दिया दिखलाने के समान है। आज हर रोज की भाग दौड़ में त्रस्त हुआ मनुष्य जब खुद को असहाय और असहज पाता है तो ऐसे में,श्रीमद्भगवद्गीता एक या ग्रन्थ न होकर,... [पूरी पोस्ट]
writer Bhavesh (भावेश )

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[20 Jan 2010 03:43 AM]

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