मैं गा लूँ जग की पीड़ा माँ [वसंत पंचमी पर - वंदना]
वीणा के तार से गीत बजेंमैं गा लूँ जग की पीड़ा माँमेरे आँसू, मेरी आहें,मेरे अपने हैं रहने दोपलकों के गुल पर ठहरकभी बहते हैं, बहने दोसुख की थाती का क्या करनाकरने दो दुख को क्रीड़ा माँवीणा के तार से गीत बजेमैं गा लूं जग की पीडा माँदेखो बिखरी है भूख...
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राजीव रंजन प्रसाद
rajeev ranjan prasad
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[20 Jan 2010 02:12 AM]



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