मैं गा लूँ जग की पीड़ा माँ [वसंत पंचमी पर - वंदना]

सफर - राजीव रंजन प्रसाद वीणा के तार से गीत बजेंमैं गा लूँ जग की पीड़ा माँमेरे आँसू, मेरी आहें,मेरे अपने हैं रहने दोपलकों के गुल पर ठहरकभी बहते हैं, बहने दोसुख की थाती का क्या करनाकरने दो दुख को क्रीड़ा माँवीणा के तार से गीत बजेमैं गा लूं जग की पीडा माँदेखो बिखरी है भूख... [पूरी पोस्ट]
writer राजीव रंजन प्रसाद

rajeev ranjan prasad

views
23
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
5
[20 Jan 2010 02:12 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix