वसन्त पंचमी
''दिये हैं मैने जगत को फूल-फल,किया है अपनी प्रतिभा से चकित-चल;पर अनश्वर था सकल पल्लवित पल-ठाट जीवन का वहीजो ढह गया है अब नहीं आती पुलिन पर प्रियतमा,श्याम तृण पर बैठने को निरुपमा।बह रही है हृदय पर केवल अमा;मै अलक्षित हूँ; यही कवि कह गया है।...
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Uday Prakash
कविता
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[20 Jan 2010 02:10 AM]



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