सच्चाइयों की बस्तियां ....
संवेदनाओं के शिखर अब ढहने लगे हैं, नयनों में भी अश्को की छटपटाहट है । सच्चाइयों की बस्तियां वीरान हैं जबसे, झूठ की ऊंची इमारतों में जगमगाहट है ।...
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sada
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[20 Jan 2010 00:43 AM]



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