मन की गलियाँ
मन कीविहंगम गलियाँऔर उसकेहर मोड़ परहर कोने मेंइक अहसासतेरे होने काबस और क्या चाहिएजीने के लिएवहाँ हमतुझसे बतियाते हैंऔर चले जाते हैंफिर उन्ही गलियों केकिसी मोड़ परऔर खोजते हैंउसमें खुद कोना तुझसे बिछड़ते हैंना खुद से मिल पाते हैंऔर मन की गलियों कीइन...
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वन्दना
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[20 Jan 2010 00:54 AM]



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