जीवन भी क्या खूब तमाशा है

gazal k bahane पल में तोला,पल में माशा हैजीवन भी क्या खूब तमाशा हैमुंह में डालो बस घुल जाएगायारो ,ग़म क्या एक बताशा हैमेरे मन में तो है रहती हरदमतुझसे मिलने की अभिलाषा हैवक्त बुरा है तब ही तो बैठी हर इक मन में आज हताशा हैलौट सदा जो आ जाती मन मेंवो दोशीजा ही तो आशा हैना... [पूरी पोस्ट]
writer श्याम सखा 'श्याम'
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[19 Jan 2010 23:10 PM]

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