पत्थरों से मारा है ...!
सलाम,दिल के जज़्बात है ज्यूँ के त्यूं रख रहा हूँ ... बाकी आपकी इनायत...--------------------------------बहर:- हजज़ मुसम्मन अश्तर (212 1222 212 1222)--------------------------------नज़रों पे हुआ रोशन अश्कों का सितारा है...क्या हसीन मंज़र है, मौत का नज़ारा...
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Kunaal
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[19 Jan 2010 22:11 PM]



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