बंदूक से बहलाये जा रहे बच्चे

dikhsa दीक्षा Anand rai आनन्द राय  , गोरखपुर : पापा पापा मुझे गन चाहिये। मम्मी मुझे गन खरीद दो। मुझे गन लेनी है। मुझे आटो गन चाहिये। बच्चों की इस तरह की जिद अक्सर खिलौने की दुकानों पर देखने को मिलती है। मां-बाप कुछ मसलहतन कुछ मजबूरन इस फरमाइश को पूरा कर रहे... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द राय
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[19 Jan 2010 21:38 PM]

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