विश्वास

feminist poems जब-जब तुमने कहा"तुम मेरी हो"मुझे लगामैं चीज़ हूँ कोईजब-जब तुमने कहा"मैं तुम्हारा हूँ"मैंने महसूस कियाएहसान कर रहे हो तुमऔर जब तुमने कहा"हम बने हैं एक-दूजे के लिये"मुझे ये प्यार नहींव्यापार लगाइतने बरस बाद भीमुझे तुम्हारे प्यार परविश्वास क्यों नहीं?... [पूरी पोस्ट]
writer mukti

दर्द

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[19 Jan 2010 14:10 PM]

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