कहीं तोह होगी वह
कहीं तोह होगी ...वह छुपी छुपी सीअपनी सी...ख़ामोशी से कुछ कहतीऔर फिर चुपके से खामोश होती वह।दीवानी ही है वह... हाँ! दीवानी ही है वहपीछे पीछे ही हूँ तेरेऐ बेकाबू धड़कन मेरी,सांसें बनके तेरी। छूना तोह बहुत चाहा...स्वप्नों के उस पार भी पहुंचे,ढूँढ़ते हुए तेरे...
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पियूष अग्रवाल
कविता
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[19 Jan 2010 12:43 PM]



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