फूल खिले बगियन में आमद फसले बहार
सुना है बसंत आ गयाबिछ गया है फूलों पेशाखों पे,हरी घास के इर्द गिर्द..हमने बहार ढूँढीजो मिली, सो बजीऔर खूब सजी उस्ताद क़व्वाल बहाउद्दीन खान के स्वरों में ...फूल खिले बगियन में आमद फसले बहार फ़रीद ऐयाज़ और अबुमुहम्मद के स्वरों में ..सखी का से कहूँ मोहे लाज...
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पारूल
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[19 Jan 2010 11:37 AM]



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