हवाओं में महका बसंत

अस्तित्व इस बार न तो कोयल कूकी, न बयार बही, न आम बौराया और न ही पलाश दहका....बहुत दबे पाँव बसंत आया...दिन-रात की तीखी खुनक के बीच दोपहर थोड़ी बहुत मुलायम हो रही है। आहट सुनाई पड़ रही है...वह अभी आया तो नहीं ही है, बस कहीं किसी पलाश पर बसंत की छाया दिखती है, बाकी... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. अमिता नीरव

शुभकामना

views
11
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[19 Jan 2010 10:50 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix