सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता हूँ...: महफूज़

मेरी रचनाएँ कहाँ खो गयीं थीं तुम?जवाब दो....मत पूछो हाल मेरा,पर मेरे हर आंसू  का हिसाब दो.बुना था जो ख़्वाब तुम्हारे साथ,उसे धड़कन बना कर पास रखा था,तस्वीर जो बनाई थी तुम्हारी,उसे आँखों में बसा कर रखा था.सिर्फ एक सवाल का जवाब आज मांगता... [पूरी पोस्ट]
writer महफूज़ अली

शिखा

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[19 Jan 2010 09:55 AM]

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