बात कुछ ऐसी कि

जो देखा भूलने से पहले ठीक करने में लगा हूँ दूरी मापककाम नहीं करता,कितनी दूर आ गया चला गया पिछली मुलाकात के बादयाद नहीं यह भीअब मैं पैदल ही नाप लेता हूँअनुपस्थित दूरियाँकहीं गए बिनाकहीं से लौटे बिनाबिता देता दोपहरकल आज कल कीकुरसी पर बैठे खिड़की के नजदीक,खुली हुई आँखों में भरता... [पूरी पोस्ट]
writer मोहन राणा - Mohan Rana
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[19 Jan 2010 06:52 AM]

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