जी करता है कभी मै तेरे होंठ गुलाबी चूमू

दर्पण के टुकड़े तुम चाहो तो मान लो ये की मुझे है तुम से प्यारजी करता है कभी मैं तेरे होंठ गुलाबी चूमूं कभी तुझे आगोश में लेकर बिना पीये ही झूमुया होठों से कोई गजल लिखूं तेरे गालो पेया कोई गीत बनाऊं तेरे मखमली से बालों पे या गदराये जिस्म के तेरे अंग अंग पे लिखूं कविताया... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[19 Jan 2010 06:45 AM]

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