हम फिर चूक गए..............घुघूती बासूती

घुघूती बासूती ज्योति बसु ने अपना शरीर ४ अप्रैल २००४ को चिकित्सीय अनुसंधान के लिए दान कर दिया था। मरणोपरांत उनकी यह इच्छा पूरी की जा रही है। उनकी आँखों की कॉर्निया तो पहले ही निकाल ली गई हैं व नेत्रहीनों के काम आएँगी। आज उनका पार्थिव शरीर भी चिकित्सीय अनुसंधान के लिए... [पूरी पोस्ट]
writer Mired Mirage

अंगदान

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[19 Jan 2010 06:07 AM]

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