एक ग़ज़ल :गुरूर-ए-हुस्न के मंज़र ...
[पिछली बार इस साईट पर एक ग़ज़ल " शौक़ है उनको मुस्कराने का......" चस्पा की थी .इस पर कुछ अहलेकारीं (पाठक गण) ने गुज़ारिश की कि राक़िम-उल-हरूफ़ (लेखक) का एक मुख़्तसर तार्रुफ़ (संक्षिप्त परिचय) भी पेश किया जाय तो रवा (उचित) होगा.इसी के मद्द-ए-नज़र उनकी एक...
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आनन्द पाठक
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[19 Jan 2010 05:45 AM]



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