व्यंग्य : ओ मंहगाई महारानी तेरा जबाब नहीं ....
ओ मंहगाई की देवी महारानी तुम्हें क्या कहूँ तेरी महिमा अपरम्पार हैं . तू कहाँ से आई कब कहाँ दस्तक दे दे तेरा कोई ठिकाना नहीं है और जहाँ तेरे चरण पड़ जाए वहां त्राहि त्राहि मच जाती है . तुझे यदि सुरसा की बहिन कहूं तो कोई दिक्कत की बात नहीं है क्योकि तू ऐसे...
[पूरी पोस्ट]
महेन्द्र मिश्र
16
1
0
1
10
[19 Jan 2010 05:26 AM]



Shuffle








