तलाश
कुछ तलाशता हुआ मैं कहाँ आ गया हूँ .....बहुत कुछ पीछे छूट गया है .....मेरी बस्ती ये तो नहीं थी .....मट्टी की वो सोंघी महक ...अब भी कभी कभी मुझे महका कर;मुझे ; मेरे गाँव की याद दिला जाती है ..कोयल के वो मधुर गीत ...वो कुहू कुहू की लम्बी तान अब भी मुझे सुबह...
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Vijay Kumar Sappatti
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[19 Jan 2010 02:05 AM]



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