ज्योतिषी का अर्थ सर्वज्ञाता होना नहीं हैं.........किसी भी विषय के जानकार की भान्ती ही ज्योतिषी की भी अपनी एक सीमा होती है।

ज्योतिष की सार्थकता किसी भी विषय का सामान्य ज्ञान जनसाधारण को न हो पाने की दशा में उस विषय के प्रति समाज में अनेक भ्रान्तियाँ उत्पन हो जाती है। ज्योतिष जो कि अपने आप में एक सम्पूर्ण विज्ञान है, परन्तु इसका विधिवत अध्ययन/अध्यापन न होने के कारण ही आज इसका वैज्ञानिक रूप... [पूरी पोस्ट]
writer पं.डी.के.शर्मा"वत्स"

विज्ञान

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[19 Jan 2010 01:49 AM]

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