व्यंग्यलोक

व्यंग्यलोक व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटएक बार मेरे मोबाइल का नेटवर्क किन्हीं दूसरे मोबाइलों के नेटवर्क से गुथ गया। जो चर्चा सुनाई दी वह हुबहू पेश है:-‘‘ऐ जी, सुनो जी, आज मेरी भी खिच गई !’’‘‘तुमसे कितनी बार कहा है कि ऊँची हिल की सैंडल मत पहना करो, सुनती ही नहीं हो!’’‘‘ऊँची... [पूरी पोस्ट]
writer प्रमोद ताम्बट

व्यंग्य

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[19 Jan 2010 01:41 AM]

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