ज्योति बाबू चले गए।

फिलहाल (1914-2010) ज्योति बाबू का निधन राजनीतिक और सामाजिक दृष्टि से एक दुखद घटना है। सी पी एम में वे हरिकृष्ण सुरजीत के जाने के बाद अकेले कद्दारवर नेता बचे थे जिनके पास देश की बढ़ोत्तरी क ब्ल्यू प्रिंट था। वे समर्पित कम्यूनिस्ट होने के बावजूद समन्व्य की... [पूरी पोस्ट]
writer गिरिराज किशोर

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[19 Jan 2010 01:32 AM]

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