दो बातें
दो अश्रुएक अश्रु मेराएक तुम्हाराठहर कर कोरों परकर रहे प्रतीक्षाबहने कीएक साथरातपिघलती जाती हैक़तरा क़तरासोना बन कर निखरने को,कसमसाती हैज़र्रा ज़र्राफूल बन कर खिलने को,हर रोज़रातदो बातेंदो बातें,एक चुपएक मौनकर रहे इंतज़ारएक कहानी बनने कीअजनबीचलो फिर बन जायें...
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मानसी
poetry
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[18 Jan 2010 22:29 PM]



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