चाणक्य नीति-स्वयं अपने गुणों का बखान करना अल्पज्ञानी का काम (apni tarif svyan na karen-hindi sandesh)
पर-प्रौक्तगुणो वस्तु निर्गुणोऽपि गुणी भवेत्।इन्द्रोऽपि लघुतां याति स्वयं प्रख्यापितैर्गृणैः।।हिन्दी में भावार्थ-जिसके गुणों की प्रशंसा अन्य लोग भी करें उसका ज्ञान भले ही अल्प हो पर फिर भी उसे गुणवान माना जायेगा। इसके विपरीत जिसे ज्ञान में पूर्णता प्राप्त...
[पूरी पोस्ट]
दीपक भारतदीप
ज्ञान
15
0
0
0
0
[18 Jan 2010 18:56 PM]



Shuffle







