अंदर जाओ वरना अंदर कर दूंगा !
पिछले दिनो जब कानपुर-लखनऊ गया तो बड़े मजेदार अनुभव हुए. कानपुर सुबह-सुबह पंहुच गया तो ट्रैफिक का मजा नहीं ले पाया. हाँ लखनऊ में जरूर कुछ आशीर्वचन सुनते-सुनाते लोग मिले. मेरे एक दोस्त ने कानपुर में कभी गाड़ी नहीं चलाई. कहते गाड़ी चलाना तो सीख लिया, गाली...
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अभिषेक ओझा
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[18 Jan 2010 18:00 PM]



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