बजट सत्य-हास्य व्यंग्य (hindi vyangya on budget)

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका उन्होंने जैसे ही दोपहर में बजट देखने के लिये टीवी खोला वैसे ही पत्नी बोली-‘सुनते हो जी! कल तुमने दो हजार रुपये दिये थे सभी खर्च हो गये। अब कुछ पैसे और दो क्योंकि अभी डिस्क कनेक्शन वाला आने वाला होगा। कुछ देर पहले आया तो मैंने कहा कि बाद में... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[07 Jul 2009 19:02 PM]

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