पुरुष को बैल बनाने का पैगाम-हास्य कविता (admi aur bail-hindi hasya kavita

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका लोगों में सोच जगाने के लिये चला रहे सभी अभियान। किताबों के गुलाम मिटाने निकले हैं गुलामी के निशान।। नारी स्वतंत्रता का नारा लगाते हुए वह मुस्कराते हैं गृहस्थी में पुरुष को बैल बनाने में ही देखते नारी की शान।। पूरी जिंदगी दिखाया समाज को उन्होंने नया... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[29 Aug 2009 14:01 PM]

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