अपनी रचनाएँ भुनाओ-हास्य कविता (apni rachna-hindi hasya kavita)

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका श्रृंगार रस का कवि पहुंचा हास्य कवि के पास लगाये अच्छी सलाह की आस और बोला ‘यार, अब यह कैसा जमाना आया समलैंगिकता ने अपना जाल बिछाया। अभी तक तो लिखी जाती थी स्त्री पुरुष पर प्रेम से परिपूर्ण कवितायें अब तो समलिंग में भी प्रेम का अलख जगायें वरना जमाने से... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[07 Nov 2009 02:34 AM]

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