हमदर्दी जताने में कमाई-हिन्दी क्षणिका

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

bharatअनुभूतिdeepak bharatdeepmast ram

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[29 Nov 2009 04:44 AM]

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